270+Ishq Shayari In Hindi | इश्क़ शायरी

प्रेम, मोहब्बत, इश्क़ बहुत नाम हैं इस एहसास के, लेकिन इश्क़ एक ऐसा लफ्ज़ है जिस पर शायरी, शेर, ग़ज़ल और नज्म सबसे ज्यादा लिखे गए हैं जब भी किसी शेर में मैंने इश्क़ को पढ़ा ना जाने क्यूँ लगा की मोहब्बत जब खोने-पाने, मिलने-मिलाने की हद से बहुत दूर निकल जाती है तब वो इश्क़ की सरहदों को छूते हुए कलम तक पहुचं ही जाती है।

यहीं से एक शायर का जन्म होता है, मोहब्बत की राह से गुज़र कर इश्क की सरहद तक के इस हसीं सफ़र में जिस भी उतार-चढ़ाव और एहसास से एक शायर रु ब रु होता है उसे उतर देता है कागज़ों पर और उनमें से कुछ शेर अमर हो जाते हैं फिर उसे हर मोहल्ले, कसबे, गावं शहर और देश में हर प्यार करने वाला अपने-अपने एहसास खोजता है और कभी अपने हमसफ़र के लिए दोहराता है, अपने वतन के लिए गुनगुनाता है, अपने दोस्तों को सुनाता है और अपने दुश्मनों पे भी कभी कभी कुछ बोल ही जाता है।

इश्क़ 2 लाइन शायरी | Ishq 2 Line Shayari

दरख़ास्त ख़ुदा के दर से ये लिख कर लौट आयी,
कि इश्क़ में महबूब का हर गुनाह मुआफ़ है ताबीर।


इश्क़ शायरी

कलम, इश्क़ के मौसम से, ख़ुशनुमा हो रही है,
तहरीर, सावन दर सावन, अब जवां हो रही है।


इश्क़ शायरी

बाक़ी सब जाने दो, बताना ज़रा, एक ऐब मेरा,
सिवा इसके, कि तुमसे इश्क़ है, बे-खौफ है।


इश्क़ शायरी

गैरत मर जाती है ‘ताबीर’ उस एक शख़्स के आगे,
इश्क़ वाले जिसे अकसर, महबूब कहते हैं।



इश्क़ शायरी

पहरे मज़हब के हो या नकाब के
तेरे इश्क़ पे बंदिशें लगाये हैं।
तन्हा, हवाओं से ली है दुश्मनी,
तेरी मोहब्बत के चिराग जलाये हैं ।

इश्क़ शायरी

चाहा था ये कि इश्क़,
काश हमें भी छु जाये,
फ़िर यूँ हुआ कि वो
महबूब बन कर चले आये ।


इश्क़ शायरी

इश्क़……मोहब्बत…….प्यार……,
ज़रा गौर से देखो,
ये अधुरे ‘लफ्ज़’ कुछ कहते नहीं ।


इश्क़ शायरी

कैसे मैं इश्क़ की तौहीन
गवारा कर लूँ,
जब बात यहाँ तक आ गयी है
तो कैसे किनारा कर लूँ ।


इश्क़ शायरी

कभी निर्वस्त्र हो कर, महफ़िल में,
कभी अग्नि-परीक्षा की तपिश में जी।
मैंने, परंपराएं निभायी हैं, हर हाल में,
इश्क़ में, इंतजाम- ए- खलिश में भी।


इश्क़ शायरी

कैसी मोहब्बत थी ये
ग़जब का इश्क़ था,
सांसे हुयी भी नहीं बंद,
जनाजे का एहतिमाम हो गया ।


इश्क़ शायरी

बे-वजह मुस्कराहट की
वज़ह कहो “ताबीर”,
गर जायज़ लगी
तो हम भी इश्क़ फरमायेंगें ।


इश्क़ शायरी

जो मर जाता है हर रोज़,
एक नये हुस्न पर,
उस शख़्स को,
‘इश्क़’ सिखायेगा कौन।


इश्क़ शायरी

इस क़दर ही टूट करते,
बेशक़ बे-इन्तहा ही करते,
गर सोच कर होता इश्क़,
तो तुम से कभी ना करते।


इश्क़ शायरी

सुनो रिहायी का वक़्त नज़दीक है,
कहो तो एक और गुनाह कर लूं,
इश्क़ हो गया आँखों की कैद से,
कहो तो कुछ दिन गुज़र कर लूं।


इश्क़ शायरी

कितना पाकीज़ा है,इश्क़ भी,
बारिशों की तरह,
बरसते इसने,
कभी झोपड़ा-ओ-महल नहीं देखा।”


इश्क़ शायरी

उसकी नफरत में, मिलावट है,
फक़त मोहब्बत की,
रूह इस क़दर तर है,
महक ए इश्क़ के खुमार में ।


इश्क़ शायरी

चन्दन सा कर गया,
वो अपने इश्क़ से चाहकर,
सांप पहलू बदलते हैं,
ज़हर महकता सा पाकर।।


इश्क़ शायरी

पेश किया जाये,
तमाम भाषा के रचनाकारों को,
मुझे “इश्क़, प्यार, मोहब्बत”,
हर लफ्ज़ मुकम्मल चाहिये।


इश्क़ शायरी

कुछ तो ख़ुदा का ख़ौफ करो,
क़ोई तो इल्ज़ाम अपने सर कहो,
इश्क़ को मिले, रुतवा उसका भी,
क़ोई तो महबूब को भी ज़र कहो।


इश्क़ शायरी

इश्क़ रिहा है, परे मह्ज़बी ज़्ंजीरों से,
तु क़ायनात मांगने चला है, इन फकीरों से।


इश्क़ शायरी

तुम मेरी इजाज़त के मोह्ताज़ नहीं ‘ताबीर’,
इश्क़ बेबाक़ है, बेपरवाह है, बे-खौफ है।


इश्क़ शायरी

कच्ची उम्र काइश्क़ था,
गुमराह कर गया बहुत,
वो चल दिया उस ओर,
मुझे किस ओर जाना है।


इश्क़ शायरी

तकनीक इश्क़ की
इंसानी समझ से परे है,
तमाम उम्र रोता है वो ‘ताबीर’,
जो भी इश्क़ करे है।


इश्क़ शायरी

निस्बत-ए-इश्क़ में निगाहें,
काविश, यार की ख़ातिर,
कासा-ए-चश्म उलझे रहें,
हुस्न-ए-दीदार में ‘ताबीर’।


इश्क़ शायरी

मैं उसको हसरतों से देखूँ
वो निगाह फेर ले,
सफ़र इ इश्क़ में फकत
यही एक मंजर रहा


इश्क़ शायरी

सुनो, मैं ‘इश्क़ का अन्धा’ हूं,
तुम तिश्नगी की बातें करते हो।


इश्क़ शायरी

डेढ़ गज का इश्क़,
जब ख़ुदा कर ना सका मेरा,
वा’दा ए मुआवज़े से,
दो गज़ जमीं नाम कर दी।


इश्क़ शायरी

लगता है इश्क़ ने छुआ नहीं अभी तक,
जो खुशनसीब होने का गुरूर बाकी है।


इश्क़ शायरी

खंडहर करके मेरे दिल की जमीं,
वो कहीं और बरसा,
इश्क़ को ठुकरा के मेरे,
सुना है वो तमाम उम्र तरसा।


इश्क़ शायरी

शिकायतें कहीं बहुत पीछे रह गयी,
हैरां हुं, दर्द से ही इश्क़ हो चला है।


इश्क़ शायरी

दस्तार मेरे इश्क़ की
उसके हाथों से बंधी है,
नामुराद, नाकाम भले ही
मेरे फेरों के सितारे रहे।


इश्क़ शायरी

तुम्हारे इश्क़ पर सियासत के बादल हैं “ताबीर”
वो बे-वजह उलझा आज़, किसी ग़ैर की खातिर।


इश्क़ शायरी

ख़ुदा के लिखे का भी जबाब नहीं है “ताबीर”
बाद इश्क़ के, जुदाई को फिर नसीब बनाये है।
पहले दिल पे एक शख़्स की तसवीर सजाये है,
क्यूं फिर उसको किसी गैर की जागीर बनाये है।


इश्क़ शायरी

दर्द की करवटों का पयाम अभी बाकी है,
आसूंओं में शिकवो का कोहराम बाकी है।
तु ही तु उतरा है, इस जिस्म की हर राह में,
रूह पे भी इश्क़ का निशान अभी बाकी है।


इश्क़ शायरी

महज़ जख़्म नहीं,
इश्क़ का नासूर है ‘ताबीर’,
तमाम उम्र रिसेगा,
शिद्दत से यार की ख़ातिर।


इश्क़ शायरी

मुर्दों ने भी, कब्र से,
सर उठा कर सलाम दिया।
इश्क़ में बर्बाद होने को,
ख़ुदा सा एहतराम दिया।


इश्क़ शायरी

कितनी परछाईयां उभरती हैं, जहन के इन दरीचों में,
कोई तुझसा रहबर, रेहनूमा नहीं मिलता।
अनजान ही रह जाते, इश्क़ शय खुबसूरत से,
गर राह ए मंजिल में, तू मुसाफ़िर नहीं मिलता।


इश्क़ शायरी

आब-ए-चश्म ना चूमे जमीं,
वो जालिम इश्क़ कैसा।


इश्क़ शायरी

महबूब के हाथों जमा हो जाऊं,
फक़त इश्क़ में अब फ़ना हो जाऊं।
आरज़ू रही ना तम्मन्ना सिवा इसके,
तू मेरी हो जाये, मैं बस तेरा हो जाऊं।।


इश्क़ शायरी

एक तजुर्बा है बड़ा गहरा है ‘ताबीर’
इश्क़ का मकाम बहुत कम ही पाते हैं।
तुम जान निकल कर दे दो फिर भी,
बदलने वाले बदल ही जाते हैं।।


इश्क़ शायरी

इश्क़ नहीं मापता औकात किसी की,
इसने नहीं बख्शी रात किसी की।
लेकर महलों से झोपड़ी तलक,
तमाम रात जागी याद किसी की।


इश्क़ शायरी

इश्क़ कर रहे हो या सौदा “ताबीर”
जो एक से नहीं हुआ तो दुसरा तैयार है।


इश्क़ शायरी

मोहब्बत के खोटे सिक्के लेकर,
इश्क़ ख़रीदने को निकले थे हम।।
वो नायाब निकला गैर की ख़ातिर,
चिल्लर से अश्क खरीद लाये हम।


इश्क़ शायरी

इश्क़ कर रहे हो या सौदा “ताबीर”
जो एक से नहीं हुआ तो दुसरा तैयार है।


इश्क़ शायरी

इस शराब से जो इतना, जल रही हो तुम,
जज्बात को इश्क़ तले, कुचल रही हो तुम।
इश्क़ तुम थी माना, मगर शौक ये भी है मेरा,
बेवजह सौतन सी आग में, पिघल रही हो तुम।


इश्क़ शायरी

तमाम रस्मे तोड़ कर, मेरे वक़्त ने पढ़ा तुझे,
कज़ा नहीं, ख़ुदा कहो, इश्क़ की जात निभाने दो।


इश्क़ शायरी

है तुम्हें अब एतराज़, कि उसकी क्यूं हुँ,
हूँ हमसफ़र तेरी भला फिर इश्क़ की क्यूं हुँ।
गर उतरे हो किसी रूह में, तो मशवरा दो “ताबीर”
वरना मत पुछो, मैं ऐसी क्यूँ हूँ, मैं वैसी क्यूँ हूँ।


इश्क़ शायरी

इश्क़ से खेले हो तुम, इश्क़ खेल गया है तुमसे,
तेरे इन लफ्ज़ों के बिखरने पे मैं इमान ले आया हूँ।
ये तजुर्बा इश्क़ का है या इश्क़ की गहराई का,
कहकहे खोद कर मैं हारा हुआ इन्सान ले आया हूँ।


इश्क़ शायरी

सुनो बे वज़ह ही जहन में, इक़बाल कर बैठे,
दुआ ए इख्लास थी करनी, हम बबाल कर बैठे।
इक़्तिज़ा ए इश्क़ रही, क़ाबिल ए क़ुबूल रहीं,
हम आहिस्ता से कहीं इश्क़ पे सवाल कर बैठ।


इश्क़ शायरी

सुनो, तुम्हारे लम्स से मुझे महक जाना है,
बाहों में सिमट के रूह तक बहक जांना है।
आओ करीब थोड़ा सा इश्क़ फरमाते है”ताबीर”
वक़्त का काम बहुत तेजी से गुज़र जाना है।


इश्क़ शायरी

इश्क़ की राहों से, वाकिफ़ हो गये तुम ‘ताबीर’
एक तबका, इन रास्तों से, महरूम रहता है।
क्या मंजिले, क्या इंतज़ार, फक़त सजदे करो,
कहा करते हैं, महबूब में, ख़ुद ख़ुदा रहता है।


इश्क़ शायरी

एक बड़े शायर को छू गयी है, नज़्म मेरी आज़,
कलम, अब दर्द-ए- इश्क़ के, राज़ देने लगी है।
बयां होने लगी शिददतें, मेरी गुफ्तगु में, ‘ताबीर’,
तमाशा, दर्द का मेरे, महफिल दाद देने लगी है।”


इश्क़ शायरी

सुनो ‘ताबीर’ टूटे ख़्वाबों में, फिर से रंग भरना है,
आगाज़ ए इश्क़ करो तुम, मुझे अंजाम बदलना है।
राह- ए- मोहब्बत में बहुत पामाल हुआ, मेरा वुजूद,
ठहराव रास नहीं मुझे, मुझे कहीं दूर निकलना है।।”


इश्क़ शायरी

मिरे इश्क़ का नशा ‘ताबीर’,
जुदाई के बाद भी, उसमें तारी रहेगा,
रूह तक उतर चुकीं थी उसकी,
वो उम्र भर, इस खुमारी में रहेगा।


इश्क़ ग़ज़ल | Ishq Gazal






















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